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Monday, September 13, 2010

आज मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ, कहानी तो सामयिक भी हो सकती है, और हो सकता है कि आपको ये कुछ पुरानी या सुनी हुई सी प्रतीत हो . पर है खालिस उपयोगी .और present scenario को suit भी करती हुई , तो चलिए अब देर नहीं करूँगा और आपको कहानी की और सीधे -सीधे ले चलता हूँ , अरे, अरे , भई ..पहले माफी तो मांग लूँ , अगर कही ,किसी मोड़ पर मैं  hinglish  हो गया तो मुझे माफ़ कर दीजियेगा, क्यूंकि, खालिस हिंदी लिखना या पचाना  आजकल के फैशन मे नहीं है;तो साहब कहानी कुछ यूँ है...
किसी एक राज्य मे एक राजा था , अरे भई, ज़ाहिर सी बात है, राज्य है तो राजा भी होगा. तो खैर, राजा बड़ा ही न्यायपूर्ण, सदाचारी और God fearing था! (ओह.हो .फिर वोही हिंगलिश.). उसके राज्य के सभी लोग बड़े ही खुशहाल और संतुष्ट थे. पर जैसा की हमेशा से होता आया है, ऊपरवाले को कुछ उल्टा सा सूझा और लो, राज्य में अचानक भयानक सूखा पड़ गया.  पेड़- पौधे, पशु -पक्षी , दानव-मानव! , जंतु-जानवर, सभी  परेशान, दुखी और बेहाल.  राजा , चूँकि दयावान और न्यायप्रिय था , उसने राजकोष मुक्त हस्त से खोल दिया , गरीबों का पेट भर गया, और गरीबों से ज़्यादा दबंगों का !(अरे भई, सलमान खान का नहीं) , भटक मत जाइये , कहनी का आनंद लेना हो अगर, तो थोड़े कम शाब्दिक होइएगा.. हाँ, तो , लोग संतुष्ट हो गए , और उपरवाला निराश ! फिर कुछ दिन बड़े आनंद से बीते, और फिर ऊपरवाले को परेशानी हो गयी, (आखिर उसे भी तो काम चाहिए!) तो जनाब, उसने इस बार खूब बारिश की, इतनी, इतनी और इतनी, क़ि भयानक बाढ़ आ गयी . लोग फिर परेशां, राजा के पास पहुंचे, राजा से गुहार लगाई पर इस बार राजा नहीं पिघला. राज्य मे भयानक अशांति का वातावरण फ़ैल गया, लोग एक-दूसरे को लूटने लगे, सौहाद्र और शांति का ह्रास (कुछ ज़टिल हिंदी तो नहीं है न! ) हो गया, ..रानी से रहा नहीं गया, उसने भी राजा से विनती की , पर राजा को न तो पिघलना-पसीजना था , न पिघला,न ही पसीजा . 
राज्य में एक शिक्षक रहता था, उसने अपनी और से प्रयास किया और , पता लगा ही लिया . उसको  पता चला  कि राजा तो वही था , पर सूखे के दौरान उसका मंत्री था -तोता, और अब इस भयानक बाढ़ के समय मंत्री हो गया है -कोव्वा !. तो ज़नाब , अब मैं इस कहानी को यहीं समाप्त करता हूँ और आपसे इजाजत लेता हूँ. पर रुकिए.. मेरे एक प्रश्न का उत्तर अवश्य देने कि कृपा करियेगा! ...कहानी सामयिक है या असामयिक........................................! और क्या , राजा सचमुच राज्य का उत्तराधिकारी बनने के काबिल था !

2 comments:

गजेन्द्र सिंह said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....

भाषा का सवाल सत्ता के साथ बदलता है.अंग्रेज़ी के साथ सत्ता की मौजूदगी हमेशा से रही है. उसे सुनाई ही अंग्रेज़ी पड़ती है और सत्ता चलाने के लिए उसे ज़रुरत भी अंग्रेज़ी की ही पड़ती है,
हिंदी दिवस की शुभ कामनाएं

एक बार इसे जरुर पढ़े, आपको पसंद आएगा :-
(प्यारी सीता, मैं यहाँ खुश हूँ, आशा है तू भी ठीक होगी .....)
http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_14.html

मो सम कौन ? said...

१. कहानी समसामयिक है जी एकदम।

२. राजा काबिल था जी, तभी तो राजा बना था(अभी अभी अंधेर नगरी चौपट राजा पढ़कर हटा हूँ, हो सकता है असर आ गया हो इस जवाब नं. दो में)