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Tuesday, September 20, 2011

एक अधूरा सपना !

कल सपने में देखा था 
एक हसीन भारत / एक खुशहाल भारत ,
हरी-भरी धरा से आवृत 
लहलहाती फसलें, प्रसन्न किसान 
खिलखिलाते बच्चे 
आश्चर्य !
देखा था मैंने , देश के नेता 
फूस की झोपड़ी
गोबर लिपे आंगन में
अपने अनुचरों के साथ 
चर्चा में लीन हैं !
देखा मैंने , अद्भुत दृश्य !
माताएं अपने नौनिहालों के साथ,
अठखेलियाँ कर रहीं हैं 
दूर कहीं हवा में विलीन 
रामचरित मानस के दोहे ,
अजान की आयतें 
चर्च की घंटियाँ
सुमधुर संगीत से आबद्ध !

पाठशालाओं में 
बच्चे समवेत स्वरों में
आह्वान करते हैं !
करते हैं माँ सरस्वती की वन्दना 
गुरूजी के चेहरे पर दिव्य तेज़ है !

सड़कों पर /गाँव के बैलों की घंटियाँ 
लय-ताल युक्त गीत 
और, हाट में गाँव के / कोई मोल-भाव नही !
चहुँ और शांति व्याप्त है 
शांति, जो सुखकर है 
समृद्ध है
वंदनीय है !

बगिया में,कोयल का सुमधुर राग 
पुरवैयों से झूलतीं  डालियों का फाग 
तलैया में श्वेताम्बरों की जाग
देखा था मैंने, कल सपने में !

टूट गया ! /शोर इतना था बाहर/आंख खुली 
तो देखा / पानी की कतार में/ बर्तन लड़ने लगे थे !

16 comments:

संजय भास्कर said...

अद्भुत सुन्दर रचना! आपकी लेखनी की जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है!

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

रुप जी----
बहुत सुन्दर शब्द आपने लिखे है वैसे,
आपने सपना देखा है, मैंने हकीकत में देखा है, बस यही फ़र्क है आप में और मुझमें

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बहुत सुंदर ...बेहतरीन शाब्दिक चित्रण किया भावों का

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

यह सब तो केवल सपने में ही दिख सकता था ...अच्छी प्रस्तुति

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 22 -09 - 2011 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में ...हर किसी के लिए ही दुआ मैं करूँ

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

लेखनी से निकले चमत्कारिक विचार.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बेहतरीन कविता।

सादर

ZEAL said...

paani ki kataar mein ladte bartan.....Great expression !

Dr (Miss) Sharad Singh said...

पुरवैयों से झूलतीं डालियों का फाग
तलैया में श्वेताम्बरों की जाग
देखा था मैंने, कल सपने में !

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति....

रेखा said...

गहरी अभिव्यक्ति ...

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

सुन्दर.... बेहतरीन चित्रण...
सादर...

अनामिका की सदायें ...... said...

ye sunder sapna to raam-rajy ka lagta hai. ab to ye tabhi sambhav hai jab srishti ek bar vinash kar fir se nayi saranchna kare.

sunder abhivyakti.

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

खुबसुरत अभिव्यक्ति

रंजना said...

विसंगतियों को अद्वितीय ढंग से रेखांकित किया है आपने...

बहुत बहुत बहुत बहुत ही सुन्दर...

मनोज कुमार said...

अति सुन्दर रचना।