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Friday, August 13, 2010

स्पर्श............

स्पर्श, इस बयार का.....
लेती हुई ,मादक अंगड़ाई
बालियाँ ,लहराते खेतों की
सन्देशा प्यार का लेकर आई है।

झूमो, नाचो, गाओ, कि दिल के तार ,
खिल उठें बयार बनकर ।
उड़ेल दो प्यार का सागर ,
बज उठे प्रकृति, लेकर नया श्रृंगार ।

उड़ता आँचल तुम्हारा,
लेता है, अठखेलियाँ .....
लहराता ऐसे, कि थम लेगा बहार सारी
अब तो न रुको, बिखराओ मादक गीत ,मिलाओ सुर .......
तुम भी , बहारों के गीत गाओ ।

3 comments:

रचना said...

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roop said...

aapka niwedan sweekarya hai, dhanyawad..... padte rahiye....

संजय भास्कर said...

बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन

Sanjay kumar
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com