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Saturday, August 28, 2010

यादें

सहेजकर रखा है-अब तक,
किताब के पन्ने मे लगाया हुआ -
गुलाब का वो फूल!
तुम्हारे कंपकपाते हाथों से लिखा, एक पन्ना -
जिसे औरो कि नज़र से छुपाकर तुमने दिया था मुझे-
"आई लव यू"
सोचा  था कई बार- फाड़ दूँ इसे ,
फेंक दूँ- गुलाब का वह सुखा हुआ फूल,
छूते  ही ,जिसकी पंखुड़िया बिखरने को बेताब सी लगतीं हैं !
पर जाने क्यूँ-
हर बार , देखता हूँ -ख़त का वो पन्ना!
पढता हूँ-तुम्हारा लिखा हुआ,
"आई लव यू"
सहला देता हूँ - हौले से ,
गुलाब कि पंखुरिओं को ,
और फिर-
सहेजकर रख देता हूँ---
किताब के उन्ही पन्नो के बीच !



2 comments:

Virendra Singh Chauhan said...

Vah...Very Touching .....

ana said...

दिल को छू लेने वालि कविता……॥बहुत सुन्दर