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Monday, February 28, 2011

               कुछ नया पाने की आस में 
चलो छूट रहा अब साथ पुराना
नया दिन, नयी रात , नए लोग,जग हो सुहाना

कुछ रीझेंगे, कुछ रिझाएंगे
कुछ सीखेंगे, कुछ सिखायेंगे
नए नभ के नव क्षितिज पर
आशाओं के नव दीप जलाएंगे .

सुखकर थे वो बीते पल-छिन
मधुमय होंगे आने वाले दिन
भूलेंगे कटु याद, कडवे घूँट
नव अमृत-कलश बरसाएंगे

कुछ विरह के दिन बिताएंगे
कुछ यादें नयी बनायेंगे ............!

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