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Monday, February 14, 2011

     प्रेम-दिवस पर 
प्रेम की अनुभूति का यह दिवस
सालहा - साल झंकृत करता मन.
तुम्हारे प्यार का वह स्वर्णिम सन्देश
आलोड़ित करता है,हृदय -तरंग.
सीमाओं का ध्यान नहीं ,
बस अनुभूति प्रभावी है 
जीवन मे आये बार-बार 
यह आकांक्षा हमारी है .
तुम आये तो यह भान हुआ 
जीवन का अर्थ निराला है ,
मधुमास -हृदय मे बना रहे 
प्रेमी मन तो मधुशाला है .

5 comments:

nilesh mathur said...

सुन्दर अभिव्यक्ति!

रूप said...

Thank You.

Kailash C Sharma said...

सुन्दर प्रस्तुति..

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

प्रेम की सार्थक अभिव्यक्ति.....

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

:)