Pages

Monday, March 14, 2011

    जापान के लिए 

नम हैं आँखें, अंतर गीला 
देखी प्रकृति की विनाशकारी लीला 

मानव जाति के प्रेरणाश्रोत तुम
छोटे कद के देवदूत तुम !

साहस अनुकरणीय तुम्हारा 
पावन हृदय, जाने जग सारा 

विश्व पताका फहराओगे 
हतभागी हो, उबर जाओगे !

तुमने  झेले, हिरोशिमा-नागासाकी 
अनुकरणीय साहस की झांकी 

नया फुकुसिमा तुम बसाओगे 
विश्वास है , उबर जाओगे 

दुःख है हमें, हमारे भाई 
ईश्वर है , वो नहीं कसाई !

प्रण करते हैं , होंगे सहभागी 
तुम्हारे लिए ,
भगवन  से  हम भी  हैं रागी !

5 comments:

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

हृदयस्पर्शी..... हार्दिक संवेदनाएं....

चैतन्य शर्मा said...

बहुत दुःख की बात ..... हम सब उनके साथ हैं...

ZEAL said...

कुदरत की इस विनाश लीला से बहुत घर उजड़ गए , कई शहरों कि बर्बादी हो गयी । कहर भी अभी थमा नहीं है , लेकिन इश्वर से प्राथना है कि जापान में सुख और शांति कि बहाली हो।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

हृदयस्पर्शी सम्वेदनाएँ!!

Patali-The-Village said...

हृदयस्पर्शी,इश्वर से प्राथना है कि जापान में सुख और शांति कि बहाली हो|