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Friday, November 12, 2010

लगता है,पढने वालों की संख्या कम होती जा रही है, कमेंट्स ही नहीं आते , अरे भाई , कोई अच्छा नहीं तो बुरा ही कह दो , कमसे कम लिखने का एक मकसद तो जारी रहे ,या लगता रहेगा ,यूँ ही की- बोर्ड पर उँगलियाँ फेरते रहे , शब्दों के ताने-बने , जाले बुनते रहे , कुछ भी लिख मारा,और कोई कमेन्ट नहीं , लोग पढने के बाद भी, मुनासिब नहीं समझते की कुछ कह दो , बेचारे ने बड़ी धीरज से ये सोचकर लिखा होगा कि शायद किसी को तो पसंद आएगा ,कोई  तो तारीफ़ करेगा , चलो तारीफ न ही सही ,कोई बुराई ही कर दे, पर कमेंट्स पाने के लिए अब लगता है की लोबी बनानी पड़ेगी, कुछेक को पटाना पड़ेगा , गुहार लगाना होगा कि भाई मेरे,कमेंट्स लिखो , अन्यथा हम लिखना छोड़ देंगे.पर क्या हमारे लिखना ह्होद भर देने कि धमकी ! देने से कमेंट्स आना शुरू हो जायेंगे.या क्या कमेंट्स न आने पर हमारा लिखना प्रभावी हो जायेगा! हरगिज़ नहीं , पर ब्लॉग्गिंग के मठाधीशों की लोबी पर कोई न कोई असर तो पड ही जाना चाहिए . मुझे 'लगे रहो मुन्ना भाई ' का वह सीन याद आ रहा है , जब शिक्षक को अपना पेंसन लेने के लिए एक-एक कर सारे कपडे उतरने पड़ते हैं , और रिश्वतखोर मजबूर होकर  पंसन के पेपर्स पास कर देता है. ( कुछ लोगोंको शायद ऐसा भी आभास हो कि यह तो बेशर्मी कि पराकाष्ठा है ,कमेंट्स पाने के लिए ब्लॉग लिखना. पर अपने अंतर्मन मे झांक कर देखो , कहीं न कहीं हर ब्लाग्गर की यही ख्वाहिश है ,कि उसके लेखों पर कमेंट्स आये ,तो भाई मेरे इतना करो कि अब दनादन कमेंट्स लिख मारों , वरना एक ब्लाग्गर पनपने के पहले ही काल-कवलित हो जायेगा ! हा...हा....हा....हा.....हा.

5 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

दे दिया कमेन्ट... पहली बात मठाधीशी के बारे में. मुझे कहीं नई दिखाई दी... मुझ से बुरा न कोय पर कायम रहें...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

उद्देश्य होना चाहिये अच्छा लिखना. टिप्पणी मिले न मिले, इससे हताश होना बेकार है. आप फैसला करें कि लिखने आये हैं या टिप्पणी प्राप्त करने. टिप्पणी बटोरना है तो किसी को भी उल्टा-सीधा लिख दो...

मदन कुमार ति्वारी said...

तू ने पुकारा और हम चले आयें । भाई अभी तक ब्लाग को वैसा मुकाम नही हासिल हुआ है की लोग उसे पढे हीं । दुसरी बात ब्लागों की डायरेक्टरी भी जरुरी है। ब्लाग खोजना भी एक समस्या है। लेकिन अखबारों के मुकाबले ब्लाग पर टिप्पणी ज्यादा होती है । वैसे लगे रहो मुन्ना भाई कभी न कभी तो हिट होगे और जब हिट होगे तो फ़िट भी होगे ।

मदन कुमार तिवारी
गया बिहार
०९४३१२६७०२७

www.madantiwary.blogspot.com

अशोक बजाज said...

बेतरीन पोस्ट .

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

:)