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Wednesday, December 7, 2011

बीत गया !

एक और बरस बीत गया 
जीवन घट रीत गया 
साथी और मंजिल यूँ ही मिलते गए 
संकट -विकट कट ,पीट गया 
चाहा था छूना आसमान मैंने भी  
कुछ पहुँच पाया , कुछ गीत गया 
मेरा तो कुछ भी अपना न था 
जो तुमने दिया वह मीत नया  !
मेरे मन की पीड़ा हर ली 
संग तुम्हरे , पल नवनीत नया .
एक और बरस बीत गया 
जीवन घट रीत गया !

5 comments:

वन्दना said...

यही जीवन सत्य है।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

सच है... सुंदर पंक्तियाँ

रंजना said...

सत्य है...ऐसे ही बीत जाते हैं पल...

दिगम्बर नासवा said...

ये जीवन का सत्य है .. समय ऐसे ही बीत जाता है ... कभी रीता कभी भरा ....

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

ऐसे सैकड़ों बरस आते रहें आपकी जीवन में और जीवन=घाट अनंत काल तक भरा रहे आनंद, सुख और शान्ति से!!