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Monday, May 2, 2011

चलो चाँद छू आयें !

दिल ने कहा-चलो चाँद छू आयें 
चाहे ,जितनी भी अड़चने आयें 
शीतल-मृदुल चाँद का स्पर्श 
पाकर क्यों न हम खिल जायें 
दूरी का भी क्या ग़म करना 
जब मंजिल पर ताक लगायें 
चलते जायें , बिना हिचक के 
मंजिल को हासिल कर पाएं 
छोटी-छोटी आशाएं हैं .
छोटे-छोटे ही हैं सपने 
इन सपनो को पालेंगे गर 
तभी स्वप्न साकार हो पाएं  

दिल ने कहा-चलो चाँद छू आयें 
 चाहे ,जितनी भी अड़चने आयें !

9 comments:

ZEAL said...

.

दिल ने कहा-चलो चाँद छू आयें
चाहे ,जितनी भी अड़चने आयें !...

Beautiful and inspiring lines Roop ji .

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ZEAL said...

.

दिल ने कहा-चलो चाँद छू आयें
चाहे ,जितनी भी अड़चने आयें !...

Beautiful and inspiring lines Roop ji .

.

वीना said...

जहां हौसले होते हैं वहीं मंजिल भी मिलती है...

मदन शर्मा said...

बहुत खूब कुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

दिल का कहा टालना भी नहीं चाहिए!!

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

जीवन की आशा को जगाती पंक्तियाँ....

रश्मि प्रभा... said...

main chaand ko roj chhuti hun... to chalen sab saath saath

Udan Tashtari said...

दिल ने कहा-चलो चाँद छू आयें
चाहे ,जितनी भी अड़चने आयें !

बस, यही हौसला तो चाहिये जीवन में किसी भी ऊँचाई को पाने के लिए..


बहुत सार्थक रचना, बधाई स्वीकारो!!!!

singh said...

भावनाओं से भरी रचना. उम्दा सोच है...

छोटी-छोटी आशाएं हैं .
छोटे-छोटे ही हैं सपने
इन सपनो को पालेंगे गर
तभी स्वप्न साकार हो पाएं


दिल ने कहा-चलो चाँद छू आयें
चाहे ,जितनी भी अड़चने आयें !
चाँद छूने का बहन अच्छा है...... बहुत सुन्दर