Tuesday, August 25, 2009
काफी दिनों के बाद
कई दिनों से कुच्छ लिखा नही , सोचता ही रह गया ब्लॉगर पर जाऊँ या नहीं ! दरअसल मुश्किल तो यह है की लोगों के पास मेरी इन भावनावों का कोई महत्व भी है क्या ? सच्चाईतो यह है की ब्लॉगर कोई पढ़ता ही नही.......
Wednesday, January 14, 2009
तराना
तुम्हारे लब पर ये तराना
लगता है जैसे
सपनों के झूले मे , कोई ...........
हसीं नाजनीन ________________
क़यामत की पेंगे मारती हुई ,
अच्छा ये तो बताओ !
ये तराना ____________
जो , तुम गुनगुना रही हो
तुम्हारे प्यार मे पड़ने का सुबूत तो नहीं!
लगता है जैसे
सपनों के झूले मे , कोई ...........
हसीं नाजनीन ________________
क़यामत की पेंगे मारती हुई ,
अच्छा ये तो बताओ !
ये तराना ____________
जो , तुम गुनगुना रही हो
तुम्हारे प्यार मे पड़ने का सुबूत तो नहीं!
Wednesday, September 17, 2008
Monday, September 15, 2008
अब आये हो तुम !
सूख चले जब नीर नदी के ,
ठूंठ पड़ गयीं जब शाखाएं
बंज़र हरीतिमा मे -
कोई नयी आस जगाने
किसको- कब भाए हो तुम,
अब आए हो तुम,-!
तन्हाई जब रास आ गयी
पतझड़ जब बन गए सहारे
ऐसे मे क्यों आए ही तुम
प्यास जगाने, पास हमारे
अब तक ही क्या पाए हो तुम
अब आए हो तुम! ............
सूख गयीं जब सारी फिजायें
धूल उड़ाती हुई हवाएं
ले आईं हैं बस संजीदी
गुम हो गयीं जब सारी घटायें
क्या कभी गुंजाये हो तुम !
अब आये हो तुम !
शाम उदासी का आँचल ओढ़े
सिमट चली है धीरे-धीरे
खुभतीं हैं नीली आँखों मे
धीमी-धीमी जब शहतीरें
जीवन भी हर्षाये हो तुम
अब आये हो तुम !
सूख गयीं जब सारी फिजायें
धूल उड़ाती हुई हवाएं
ले आईं हैं बस संजीदी
गुम हो गयीं जब सारी घटायें
क्या कभी गुंजाये हो तुम !
अब आये हो तुम !
शाम उदासी का आँचल ओढ़े
सिमट चली है धीरे-धीरे
खुभतीं हैं नीली आँखों मे
धीमी-धीमी जब शहतीरें
जीवन भी हर्षाये हो तुम
अब आये हो तुम !
Wednesday, September 10, 2008
Thursday, September 4, 2008
अक्स
नैनों के बंद कपाट खोल कर देखो
तुम्हे अपने अक्स मे ही सब नज़र आएगा
देखो देव तुम या देखो इब्लीस
रफ्ता रफ्ता दीवाना बदल जायेगा
मौसम की गमगीनी का हो गुमां
या हो खुशी की लरज़ती फुहारें
तुम्हारे ही आगोश के दरमियाँ
खुदा का हर हुस्न नज़र आएगा
ऐ यारब तूने बनाई है दुनिया ऐसी
कीहर शख्स तुझे ही कोसता है
सच तो ये है के बराबर ही बांटा तूने
तेरी यादों मे परवाना गुज़र जाएगा !
तुम्हे अपने अक्स मे ही सब नज़र आएगा
देखो देव तुम या देखो इब्लीस
रफ्ता रफ्ता दीवाना बदल जायेगा
मौसम की गमगीनी का हो गुमां
या हो खुशी की लरज़ती फुहारें
तुम्हारे ही आगोश के दरमियाँ
खुदा का हर हुस्न नज़र आएगा
ऐ यारब तूने बनाई है दुनिया ऐसी
कीहर शख्स तुझे ही कोसता है
सच तो ये है के बराबर ही बांटा तूने
तेरी यादों मे परवाना गुज़र जाएगा !
Sunday, July 20, 2008
फ़िर एकबार
बसंत आया नही अब तलक
rah गयी है शीत की रिक्तता
स्नायु रह गए हैं बस आस -भरोसे
हरित स्वप्न दल उमड़ रहे हैं-
सख्त कंक्रीट मे !
वास्त्विक्तावों ने आकर कामनाओं के -
परिचय दिए हैं चेतना के सतरंगी इन्द्रधनुष
पुछ गए हैं!
फ़िर भी- पिछली बार की तरह -
पकड़ कर रक्खा है
किसी एक अनागत भविष्य को ,
astitwa को अपने ठुकराकर -
आरम्भ करते हैं -
naye rah par chalna
एक नयी प्रतीक्षा ---
कल की तरुनी -
उषा की भैरवी मे मिलाना चाहते हैं -
jeewan का नया सुर
फ़िर एकबार
rah गयी है शीत की रिक्तता
स्नायु रह गए हैं बस आस -भरोसे
हरित स्वप्न दल उमड़ रहे हैं-
सख्त कंक्रीट मे !
वास्त्विक्तावों ने आकर कामनाओं के -
परिचय दिए हैं चेतना के सतरंगी इन्द्रधनुष
पुछ गए हैं!
फ़िर भी- पिछली बार की तरह -
पकड़ कर रक्खा है
किसी एक अनागत भविष्य को ,
astitwa को अपने ठुकराकर -
आरम्भ करते हैं -
naye rah par chalna
एक नयी प्रतीक्षा ---
कल की तरुनी -
उषा की भैरवी मे मिलाना चाहते हैं -
jeewan का नया सुर
फ़िर एकबार
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