सावन के झूलों में
पींगे पिया के याद की समाई हैं
तुम आओ ना,रिमझिम की झड़ी
तुम्हारे प्यारे स्पर्श का संदेशा तो ले आईं हैं !
नयन राह तकते हैं ,
झोंके बयार के मादक लगते हैं
ऐसे में जब गूंजती है प्यार की शहनाई
पिया ,नस-नस में एक हुलास सी ले आई है
सखियाँ जब करती हैं रात की बातें
गुजारी बाँहों में सौगात की बातें
तुम्हारे स्नेहिल-स्पर्श की यादें
मेरे दिल की धडकने देती हैं दुहाई
लेती हैं नाम तुम्हारा , कहती हरजाई हैं
तुम आओ ना ,रिमझिम की झड़ी
तुम्हारे प्यारे स्पर्श का संदेशा तो ले आयीं हैं !





